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Toggleपेट में इन्फेक्शन के लक्षण – Pet me Infection ke Lakshan
इस पोस्ट में आपको पेट में इन्फेक्शन के लक्षण Pet me Infection ke Lakshan के बारे में बताया गया है. और साथ ही बताया गया है की पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) क्या है? पेट में इन्फेक्शन के कारण और जोखिम, गैस्ट्रोएन्टराइटिस में परहेज में क्या परहेज करें? साथ ही पेट के इन्फेक्शन के घरेलू उपाय भी बताएं गए है, पेट के इन्फेक्शन के विषय में पूरी जानकारी के लिए अंत तक पढ़ें.
पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) क्या है? – What is Stomach Infection (Gastroenteritis)?
यह पेट का इन्फेक्शन वायरस के वहज से होने वाली बीमारी है. इस इंफेक्शन को मेडिकल भाषा में गैस्ट्रोएंट्राइटिस Gastroenteritis भी कहते है. यह इंफेक्शन आंखों में जलन और सूजन से संबंधित होता है. इस इंफेक्शन की वजह से पाचन क्रिया इस स्तर तक प्रभावित होती है कि पानी भी नहीं पढ़ पाता है. यह पेट का इन्फेक्शन प्रदूषित भोजन या पानी के सेवन और संक्रमित व्यक्ति के झूठा खाने के कारण भी हो सकता है. यह बीमारी सेहतमंद लोगों में आसानी से ठीक हो जाती है परंतु बच्चे बूढ़े और कम एमबी वाले लोगों ने यह बीमारी घातक साबित हो सकती है इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखें.
पेट में इन्फेक्शन के प्रकार – Types of Stomach Infection in Hindi
गैस्ट्रोएन्टराइटिस के प्रकार क्या है?
- वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस (Viral Gastroenteritis) – वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस Viral Gastroenteritis अनेक प्रकार के वायरस से पेट और आंतों में होने वाली एक सूजन है. इसे पेट के फ्लू के नाम से भी जाना जाता है. यह अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के पास या उसके संपर्क में आने से या फिर दूषित भोजन अथवा पानी के माध्यम से फैल सकती है.
- बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस (Bacterial Gastroenteritis) – बैक्टीरिया के द्वारा आपकी आंत में होने वाले संक्रमण को बैक्टीरियस गैस्ट्रोएन्टराइटिस Bacterial Gastroenteritis कहते हैं. गैस्ट्रोएन्टराइटिस के अधिकतर मामले वायरल संक्रमण की वहज से होते हैं, परंतु बैक्टीरियल संक्रमण सामान्य ही होते हैं. इस संक्रमण को लोग अक्सर फूड पॉइजनिंग Food Poisoning समझ लेते हैं, लेकिन यह दोनों अलग है. बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस स्वच्छता पर ध्यान न देने के कारण हो सकता है. यह संक्रमण जानवरों के समीप आने या बैक्टीरिया से दूषित भोजन और पानी के सेवन के कारण भी हो सकता है.
पेट में इन्फेक्शन के कारण और जोखिम – Stomach Infection Causes & Risk Factors in Hindi
वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस (Viral Gastroenteritis) –
जब आप संक्रमित व्यक्तियों के साथ अपने बर्तन, तोलिया और भोजन को साझा करते हैं या फिर जब आप दूषित भोजन या पानी का सेवन करते हैं तो आपको वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस से संक्रमित होने की संभावना बढ़ सकती है.
गैस्ट्रोएन्टराइटिस के लिए कई प्रकार के वायरस जिम्मेदार होते हैं इन्हें समझते है कि ये कौन से वायरस है:
नोरोवायरस Norovirus: व्यस्क और बच्चे नोरोवायरस से के कारण संक्रमित होते हैं जो खाद्य जनित बीमारी का सबसे महत्वपूर्ण कारण होता है. नोरोवायरस संक्रमण अगर किसी एक व्यक्ति को हो जाए तो यह उसके परिवार या समुदाय के बाकी लोगों को तेजी से हो सकता है. विशेषकर छोटे घरों या कमरों में रहने वाले लोगों के बीच इस रोग के फैलने की अधिक संभावना बढ़ जाती है. ज्यादा मामलों में दूषित भोजन या पानी के जरिये वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर सकता है. हालाँकि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी इस वायरस का फैलना संभव है.
रोटावायरस Rotavirus: यह बच्चों में वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस का सबसे मुख्य कारण है. बच्चे आमतौर पर तब संक्रमित होते हैं. बच्चे इस वायरस से तब संक्रमित होते हैं जब वे वायरस द्वारा दूषित अपनी उंगलियों या अन्य वस्तुओं को अपने मूंह के अन्दर डालते हैं. शिशुओं और छोटे बच्चों में यह संक्रमण सबसे खतरनाक साबित होता है. संक्रमित वयस्कों में ऐसा हो सकता है कि उनमें कोई लक्षण न दिखे लेकिन फिर भी वह दूसरे लोगों को संक्रमित कर सकते हैं.
बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस (Bacterial Gastroenteritis) –
अगर भोजन बैक्टीरिया से दूषित हो जाता है और कई घंटों तक फ्रिज में ने रखा जाए, तो उसमें बैक्टीरिया की संख्या बढ़ने लगती है और उस भोजन को खाने वाले इंसान में संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है.
आमतौर पर इन खाद्य पदार्थों की वजह से बीमारी होने की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है:
- बिना उबला हुआ दूध या उस से बनी चीजें
- कच्चे अंकुरित अनाज
- फल और सब्जियों का जूस
- कच्चे या अधपके अंडे, मांस इत्यादि
पेट में इन्फेक्शन के जोखिम कारक क्या है?
जो लोग जठरांत्र शोथ से आसानी से प्रभावित हो सकते हैं उनमें ये शामिल है:
- छोटे बच्चे – प्राथमिक विद्यालयों या बाल देखभाल केंद्र के बच्चों को विशेष रूप से इस बीमारी के होने का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत होने में बहुत समय लग जाता है.
- अधिक उम्र के लोग – इम्युनिटी बढ़ती उम्र के साथ-साथ कमजोर होने लगती है. नर्सिंग होम में भर्ती बड़ी उम्र के लोग या बुजुर्ग विशेष रूप से इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि उनकी इम्यूनिटी बहुत ही कमजोर होती है और नर्सिंग होम में उन्हें संक्रमित होने का खतरा बना रहता है.
- स्कूली बच्चे या छात्रावास में रहने वाले लोग इत्यादि – जो भी लोग ऐसी जगह आते जाते हैं. उन लोगों को जहां बहुत से लोग छोटी सी जगह में एकत्रित होते हैं उन्हें उस जगह पर संक्रमित होने का खतरा ज्यादा बना रहता है.
- कमजोर यूनिटी वाले लोग – जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है ऐसे लोगों को संक्रमण होने का खतरा ज्यादा बना रहता है.
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गैस्ट्रोएन्टराइटिस में परहेज – What to Avoid in Gastroenteritis:
- वसा युक्त खाद्य पदार्थ (Fatty Foods) – वसायुक्त और चिकनाई वाला भोजन पेट के लिए नुकसानदायक साबित होता है. फैटी मांस, वसा युक्त खाद्य पदार्थ और मेवे भी पाचन तंत्र को खराब कर सकते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप आप को दस्त भी हो सकते हैं.
- डेयरी उत्पाद (Dairy Products) – अगर आपको गैस्ट्रोएन्टराइटिस है, तो आप कुछ समय तक पनीर, दूध और अन्य डेयरी उत्पादों का सेवन बंद कर दें, क्योंकि इन उत्पादों में लेक्टोज होता है जिसको पचाने में आपको कठिनाई हो सकती है.
- फाइबर (Fiber) – फाइबर युक्त सब्जियों और फलों को खाने से बचें. यह आपके होने वाले दस्त का कारण भी बन सकते है. नाशपाती, सेब, ओट्स, ब्रोकली, तिल के बीज, मटर और मक्का आदि फाइबर के मुख्य स्रोत होते हैं
- कैफ़ीन (Caffeine) – कैफीन युक्त पदार्थ जैसे – चाय, कोल्ड ड्रिंक, कॉफी आदि पीने से बचे. कैफीन मूत्र वर्धक का कार्य भी करता है. जिसके कारण आपको बार बार शोचालय भी जाना पड़ सकता है.
- मसालेदार भोजन (Spicy Food) – भोजन में ज्यादा गर्म मसाले, मिर्च और लहसुन का प्रयोग आपके लक्षणों को बढ़ा सकता है, जिसके कारण आपका पेट खराब हो सकता है.
- चीनी (Sugar) – शर्करा युक्त पेय पदार्थों में खाद्य पदार्थों का सेवन करने से रक्त शर्करा के स्तर में बढ़ोतरी होती है कुछ लोगों में यह उल्टी पैदा कर सकते है.
- शराब (Liquor) – शराब से दूर ही रहे तो ठीक है. यह पेट की अंदरूनी परत और पाचन तंत्र में सूजन और जलन पैदा कर सकती है, और गैस्ट्रिक एसिड के उत्पादन को अधिक मात्रा में बढ़ा सकती हैं.
- साइट्रस फल (Citrus Fruits) – खट्टे फल जैसे कि अंगूर, नारंगी आदि. टमाटर और अनानास से बने उत्पादों में अत्यधिक मात्रा में एसिड होता है, जिसके कारण पेट में जलन और गैस बन सकती है.
- ग्लूटेन (Gluten) – यह गेहूं और अन्य अनाज जैसे कि राई, जों और ओट्स में पाए जाने वाला प्रोटीन होता है. यह पेट में दर्द दस्त और सूजन पैदा कर सकता है. ग्लूटेन युक्त पदार्थों से दूर रहकर इसके लक्षणों को कम करने में सहायता मिल सकती है.
- प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ (Processed Foods) – प्रोसैस्ड खाद्य पदार्थों में अधिक मात्रा में शर्करा, वसा, परिरक्षक और कृत्रिम रंग पाए जाते हैं. इनका उपयोग करने से स्थिति और खराब हो सकती है. गंभीर रूप से दस्त भी हो सकते हैं.
पेट में इन्फेक्शन के लक्षण Gastroenteritis Symptoms in Hindi:
पेट में इन्फेक्शन के लक्षण Pet me Infection ke Lakshan नीचे दिए गए है:
- दस्त (Diarrhea) – कई बार लोग पेट ख़राब होने की दिक्कत से परेशान रहते है.यह पेट में इन्फेक्शन Pet me Infection के कारण ही हो सकता है. लेकिन ज्यादातर लोग इसे नार्मल समझकर नज़रअंदाज कर देते है. अगर आप लम्बे समय से दस्तों से परेशान है, तो यह पेट में इन्फेक्शन का लक्षण हो सकता है. एसी स्थिति में आप खुद डिहाइड्रेटेड महसूस कर सकते है.
- उल्टी (Vomit) – उलटी को लोग अक्सर नार्मल समझ लेते है. लेकिन अगर आपको बार बार उल्टियाँ हो रही है तो इसे नज़रंदाज़ न करें. बार बार उल्टियों का होना पेट में इन्फेक्शन Pet me Infection का लक्षण हो सकता है. ऐसे में आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
- मांसपेशियों में दर्द (Muscle Pain) – मांसपेशियों के दर्द को ज्यादातर लोग कमजोरी समझ लेतें है और इसे नज़रअंदाज कर देते है. लेकिन मांसपेशियों में दर्द पेट में इन्फेक्शन Pet me Infection की वजह से भी हो सकता है.
- पेट में मरोड़ और दर्द (Abdominal Cramping and Pain) – पेट में इन्फेक्शन Pet me Infection का सबसे आम लक्षण पेट का दर्द ही होता है. इस दौरों आपको पेट में तेज़ दर्द और मरोड़ हो सकती है. लेकिन हर पेट दर्द पेट का इन्फेक्शन भी नहीं हो सकता.
- हल्का बुखार और ठण्ड लगना (Mild Fever and Chills) – पेट में इन्फेक्शन Pet me Infection में आपको हल्का बुखार और ठण्ड भी लग सकती है.
- थकान और भूख में कमी (Fatigue and Loss of Appetite) – पेट में इन्फेक्शन Pet me Infection में आपको भूख में कमी के साथ साथ थकान भी महसूस हो सकती है.
अगर आपको ये पेट में इन्फेक्शन के लक्षण Pet me Infection ke Lakshan दिखें तो इसका तुरंत इसका इलाज करें.
पेट में इन्फेक्शन का इलाज Pet me Infection ka Ilaj:
- केले में पोटेशियम होता है जो पेट के इन्फेक्शन को ठीक करने में मदद करता है. यह बहुत जल्दी ही पच जाता है और पेट को ठीक कर देता है.
- यदि आप अपने पेट के इन्फेक्शन को ठीक करना चाहते है तो आप सुबह खाली पेट हल्के गुनगुने पानी से थोड़ी सी हींग ले सकतें है.
- शुद्ध शहद को दालचीनी पाउडर में मिलाकर सेवन करने से पेट सम्बंधित किसी भी समस्या को ठीक किया जा सकता है. यह गैस्ट्रिक की समस्या को जड़ से ख़त्म कर देता है.
- अगर पेट के संक्रमण से छुटकारा पाना चाहते है तो हल्दी का सेवन कर सकते है.1 चम्मच हल्दी पाउडर में 6 चम्मच शहद मिला लें, फिर इसे एक एयरटाइट जार में रख दे. इस मिश्रण को आधा चम्मच दिन में 2 बार खाएं. ऐसा करने से पेट का इन्फेक्शन ठीक हो जाएगा.
पेट में इन्फेक्शन के लक्षणों से सम्बंधित FAQs:
पेट में इन्फेक्शन कैसे होता है?
पेट में इन्फेक्शन ज्यादातर दूषित भोजन और पानी के सेवन से होता है. इसके अलावा संक्रमित लोगों के संपर्क में आने से भी इस इन्फेक्शन के होने का खतरा बना रहता है.
पेट में इन्फेक्शन में क्या खाना चाहिए?
पेट के इन्फेक्शन में हल्का भोजन जैसे कि खिचड़ी, चावल, दलिया जैसे हलके भोजन का सेवन करना चाहिए.
पेट का इन्फेक्शन को ठीक होने में कितना समय लग सकता है?
सही समय पर सही इलाज मिलने पर पेट का इन्फेक्शन कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है. हालाँकि लोग 14 दिनों या उससे ज्यादा समय तक महसूस कर सकते है.
पेट में इन्फेक्शन के घरेलू उपाय?
घर पर पेट के इन्फेक्शन में आराम पाने के लिए जायफल तेल, अनार, और गर्म पानी के साथ लोंग का सेवन कर सकते है.
निष्कर्ष:
मुझे उम्मीद है कि आपको ये पोस्ट पेट में इन्फेक्शन के लक्षण Pet me Infection ke Lakshan जरुर पसंद आयी होगा. यदि आपके पास कोई और पेट में इन्फेक्शन कोई घरेलू उपाय है तो हमारे साथ इसे शेयर कर सकते हैं. इस पोस्ट को अपने दोस्तों और रिश्तेदार के साथ जरूर शेयर करें जिससे अन्य लोगो को सही जानकारी मिले.
इस पोस्ट में दी गई सभी जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. इसलिए इस पर अमल करने से पहले किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए.
