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गठिया को जड़ से खत्म करने के उपाय- आज के समय में लोगों को गठिया या अर्थराइटिस की समस्या बहुत ही ज्यादा देखने को मिलती है. लेकिन आजकल इस बीमारी से युवा और बच्चे भी बहुत परेशान है. इस बीमारी से ग्रसित मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढती ही जा रही है.
अगर शरीर में सामान्य से अधिक यूरिक एसिड की मात्रा बनने लगे तो गठिया या अर्थराइटिस की समस्या होने लगती है. गठिया रोग की शुरुआत पैरों से होती है और धीरे-धीरे दूसरे जोड़ों तक फ़ैल जाती है. गठिया रोग के होने पर रोगी के जोड़ों में बहुत तेज दर्द होता है जिसका समय पर इलाज न किया जाए तो व्यक्ति को कई समस्याओं का सामना करना पद सकता है.
गठिया (आर्थराइटिस) क्या है – What is Arthritis in Hindi
गठिया एक दर्दनाक रोग है. जब हड्डियों के जोड़ो में यूरिक एसिड सामान्य से अधिक मात्र में जमा हो जाता है, तो वह गठिया का रूप ले लेता है. गठिया हल्के दर्द से शुरू होकर गंभीर अवस्था तक ले जाता है.
गठिया रोग के होने पर रोगी जोड़ो में सूजन, दर्द, अकड़न और कांटे चुभने जैसा महसूस होता है. और रोगी को सबसे ज्यादा समस्या जोड़ो में जैसे कि कोहनियाँ और घुटनों में होती है जहाँ पर दो हड्डियाँ आपस में मिलती है.
गठिया के लक्षण – Symptoms of Arthritis in Hindi
केवल जोड़ो में दर्द होने से गठिया रोग की पहचान नहीं की जा सकती है. जोड़ों में केवल दर्द होना आर्थ्राल्जिया का संकेत होता है लेकिन जोड़ों में अगर सूजन के कारण दर्द होता है तो यह अर्थराइटिस का लक्षण है. अर्थराइटिस के कुछ मुख्य लक्षण नीचे दिए गए है:
- जोड़ों में जलन का रहना
- एक या एक से अधिक जोड़ों में दर्द का होना
- जोड़ों में दर्द के साथ-साथ सूजन का होना
- वजन का घटना
- पैरों और हाथों को हिलाते समय जोड़ों में हल्का या तीव्र दर्द का होना
- सामान्य गति की कमी
- घुटनों को मोड़ने में असहनीय पीड़ा का होना
गठिया के कारण – Causes of Arthritis in Hindi
गठिया रोग होने के कई कारन हो सकते है जैसे कि:
- अगर आपके शरीर का वजन ज्यादा है तो कूल्हों, घुटनों, और कमर पर अधिक बोझ पड़ने से आगे चलकर इससे गठिया रोग उत्त्पन्न हो सकता है.
- हमारे शरीर के जोड़ो में एक नरम और लचीला टिश्यू पाया जाता है जिसे कार्टिलेज कहा जाता है. जब हम चलते है तो जोड़ो के ऊपर दबाव पड़ता है. एसी स्तिथि में कार्टिलेज प्रेशर और शॉक को अवशोषित करके हमारे जोड़ो को सुरक्षा देता है. जब किसी इंसान को गठिया रोग जैसी बीमारी हो जाती है तो एसे समय में कार्टिलेज की मात्रा में कमी आ जाती है. जिसकी वजह से एक हड्डी दूसरी हड्डी से रगड़ती है और पैर में परेशानी की शुरुआत हो जाती है.
- ज्यादातर आमतौर पर 50 से 60 साल के लोगों को गठिया की समस्या होती है लेकिन आजकल युवा पीढ़ी भी इस समस्या से पीड़ित है.
- शरीर में किसी वायरस या बैक्टीरिया होने के कारण भी गठिया रोग होने का खतरा बना रहता है.
- अगर आपके शरीर के हड्डियों के जोड़ो में कोई गहरी चोट लगी हुई है तो भी गठिया रोग होने की सम्भावना बन जाती है.
गठिया को जड़ से खत्म करने के उपाय – Gathiya Ko Jad Khatam Karne Ke Upay
हल्दी-
गठिया की समस्या से आराम पाने के लिए हल्दी बहुत ही असरकारक है. हल्दी में करक्यूमिन नाम का एक तत्व पाया जाता है, जो अर्थराइटिस के कारण जोड़ो में होने वाले दर्द से राहत दिलाता है. हल्दी में मौजूद एंटी इंफ्लेमेंट्री गुण जोड़ो में सूजन कम करने में मदद करते है. गठिया को पूरी तरह से खत्म करने के उपाय करने के लिए एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से राहत मिलती है. इसके अलावा गठिया से प्रभावित स्थान पर हल्का गर्म हल्दी को एक कपड़े में बांधकर लपेट लें. इसे लपटने से दर्द औऱ सूजन दूर हो जायेगी.
मेथी-
मेथी के दाने भले ही स्वाद में कड़वे लगते है परन्तु इनका सेवन करने से बहुत सारे फायदे मिलते है. मेथी दाना एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटी आर्थराइटिक का मुख्य स्रोत होता है. इसलिए गठिया के रोगियों को मेथी दाने का सेवन करना चाहिए.
इसके लिए एक चम्मच मेथी दानों को 1 कफ पानी में डालकर रात भर के लिए भिगोकर रख दें. मोर्निंग में उठकर इस पानी को पिएँ और दानों को चबाकर खायें.
अदरक-
गठिया के दर्द और सूजन से राहत पाने के लिए अदरक एक बहुत ही कारगार उपाय है. अदरक शरीर के प्रोस्टाग्लैंडीन के स्तर को कम करके गठिया की समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है.
सेब का सिरका-
सेब के सिरके में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते है जो शरीर के लिए बहुत लाभदायक होते हैं. इसके साथ सेब के सिरके की खास बात यह है कि इसे लम्बे समय तक स्टोर करके रखा जा सकता है.
गठिया को पूर्णतः खत्म करने के लिए एक कप गर्म पानी में एक चम्मच सेब का सिरका और शहद मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें. अब इस मिश्रण को रोज सुबह पीने से गठिया से रहत मिलती है.
गठिया के लिए लाल मिर्च का उपयोग-
लाल मिर्च गठिया के लक्षणों को कम करने में बहुत मददगार साबित होती है. इसका एक सक्रिय संघटक कैप्साइसिन होता है जो दर्द को कम करने में सहायक है. कैप्साइसिन युक्त मलहम या क्रीम को प्रभावित क्षेत्रों पर रोजाना लगाने पर दर्द में आराम मिलता है.
लहसुन का उपयोग-
लहसुन में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते है जो दर्द कम करने में सहायता करते है. गठिया (अर्थराइटिस) की समस्या से निजात पाने के लिए रोजाना सुबह तीन से चार लहसुन की कलियों का सेवन कर सकते है. लहसुन गठिया के दर्द और सूजन कम करने में सहायता करता है और साथ ही गठिया के कारण मांसपेशियों के क्षतिग्रस्त होने से बचाने में सहायता करता है.
गठिया के दर्द से तुरंत आराम पाने के लिए लहसुन के तेल को आप दर्द वाली जगह पर लगा सकते हैं. लहसुन का तेल बनाने के लिए सबसे पहले आप लहसुन की कुछ कलियों को छीलें और अब एक कटोरी में थोडा सा सरसों का तेल में डालकर इसको पका लें. पकने के बाद जब तेल थोडा सा ठंडा होने लगे तो इसे गठिया के दर्द से प्रभावित स्थान पर लगाने से तुरंत आराम मिलता है.
गठिया के लिए सरसों के तेल का उपयोग-
सरसों के तेल में बहुटी सारे ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो दर्द निवारक के रूप में काम करते हैं. इसलिए गठिया रोग से छुटकारा पाने के लिए सरसों के तेल बहुत उपयोगी सिद्ध होता है.
गठिया से छुटकारा पाने के लिए थोड़े से सरसों के तेल को गर्म करें और धीरे-धीरे मालिस करें. अगर आपको दर्द के साथ-साथ सूजन भी है तो सरसों के तेल के बराबर मात्रा में प्याज के रस को मिलाकर मालिस करें.
तुलसी का उपयोग-
तुलसी एक औषधीय पौधा है जिसमें बहुत से विटामिन्स और मिनरल्स अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. इसके अलावा तुलसी अर्थराइटिस की समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकता है.
अर्थराइटिस से राहत पाने के लिए रोजाना 3 से 4 तुलसी के पत्ते का सेवन कर सकते हैं या तुलसी की चाय पी सकते हैं.
गठिया में क्या नहीं खाना चाहिए –
गठिया से पीड़ित मरीजों में यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है कि वे गठिया में कौनसी चीज़ें न खाएं. आपको खाने में निम्न परहेज़ करना चाहिए:
- गठिया के मरीजो को अधिक नमक के सेवन से बचना चाहिए.
- अधिक मात्रा में मिर्च मसालेदार, तले हुए खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज़ करना चाहिए.
- चीनी युक्त खाद्य पदार्थ के सेवन से बचना चाहिए.
- चाय का सेवन बिल्कुल न करें.
- आपको ज्यादा कॉफी, चाय, शराब और मांस इत्यादि के सेवन से बचना चाहिए.
- खटाई वाले भोज्य पदार्थ जैसे कि दही, इमली, अमचूर इत्यादि के सेवन से बचना चाहिए.
गठिया में क्या नहीं खाना चाहिए – FAQs
गठिया (अर्थराइटिस) किस कमी से होता है?
अर्थराइटिस होने का मुख्य कारण शरीर में कैल्शियम की कमी का होना है. इसके अलावा घुटनो में चोट लगने की वजह से भी गठिया होने का खतरा बढ़ जाता है.
गठिया रोग में कौन सा तेल लगाना चाहिए?
जैतून के तेल के इस्तेमाल से गठिया के कारण जोड़ों में होने वाली परेशानी में आराम मिलता है. कच्चा जैतून का तेल जो विशेष रूप से इस्तेमाल करना चाहिए.
अर्थराइटिस में कौन सी दाल खानी चाहिए?
चने और मसूर की दाल गठिया के मरीजों के लिए अधिक फायदेमंद होती है.
गठिया (अर्थराइटिस) के मरीज को क्या नहीं खाना चाहिए?
गठिया के मरीज को अपने खाने में परहेज करना चाहिए जैसे कि अरबी, उड़द, ज्यादा नमक, भिंडी आदि के सेवन से बचना चाहिए.
निष्कर्ष –
मुझे आशा करता हूँ कि आपको यह पोस्ट गठिया को जड़ से खत्म करने के उपाय (Gathiya Rog Ka Ilaaj) जरुर पसंद आई होगी. अगर आपने मन में इस पोस्ट को लेकर कोई सवाल या सुझाव हैं तो नीचे बॉक्स में कमेंट कर सकते है.
नोट –
हमारी इस पोस्ट में दी गई सभी जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. अतः इस पर अमल करने से पहले किसी डॉक्टर या चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें.
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